Follow by Email

If you’re on Twitter, go ahead and follow me and say hello.

Search This Blog

Jan 29, 2012

"आसमान '"

आसमान से बातें कर लें ,
बादल को फिर मित्र बना लें ,
पूछें -क्यूँ रोता है ?वर्षा करता ,
अश्रु रोदन के या हर्षित होता /
पक्षी कलरव करते उड़ते ,
पंक्ति जैसे कविता लिखते ,
बादल बीच सूर्य झरोखा ,
चन्द्र दिखाता अंश खेल का ,
तारे छितराए से !
जन्म मृत्यु को प्राप्त हुएय से ,
आदि शब्द था ,अंत न उसका ,
शब्द खेल है संघातों का ,
अन्दर बाहर,प्रेम पीर का !
इसी प्रेम से उपजी सृष्टि ,
इसी प्रेम की हम पर दृष्टि /

1 comment:

Isha said...

"बादल को फिर मित्र बना लें ," kya baat hai!!!!!!!!!

Featured Post

नेता महान

मै भारत का नेता हूँ  नेता नहीं अभिनेता हूँ  चमचे चिपकें जैसे गोंद  धोती नीचे हिलती तोंद // मेरी तोंद बढे हो मोटी  सारे चेले सेंक...