Mar 7, 2012

"इस होली तू लगती न्यारी "

इस होली तू लगे अनूठी
रंग खेले ना अब क्यूँ रूठी ?
ला गुलाल अब खेलूं होली
मस्त हुई रंगों की टोली
धूलिवंदन बिन भंग अधूरा
तू मद मस्त रंग है पूरा /
ला टेसू रंग ,सारा रंग दूँ
अंग बचे ना ,अंगिया रंग दूँ
उधर कहीं तू छुपती कब तक
पिचकारी से बचती कब तक ?
बच्चे दूर वहां किलकारी
अब रंग रंगी लगी तू प्यारी
ना भाग कहीं तू खा पिचकारी
इस होली तू लगती न्यारी //

7 comments:

anjusambhi said...

pyari , nyari si rango mein rangi kavita ....

ana said...

holi ki shubhakamnaye

Neeraj Tyagi said...

बहुत बहुत धन्यवाद ! आपको भी :)

Mithilesh said...

बहुत दिलचस्प अभिव्यक्ति....

आपको सपरिवार रंगपर्व होली पर फागुनी शुभकामनायें !

Neeraj Tyagi said...

धन्यवाद ! आपको भी :)

bikharemoti said...

अच्छी कविता है ...

Neeraj Tyagi said...

thnx