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Mar 15, 2012

दृश्य शक्ति

सूरज !
क्या कभी छिपता है ?
चाँद !
क्या कभी घटता है ?
ये तो हम हैं
और हमारी दृश्य शक्ति
उतना उजाला
जितनी शक्ति //

11 comments:

Seema said...

very beautiful lines....very true

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

Neeraj Tyagi said...

धन्यवाद ! शास्त्री जी

Udan Tashtari said...

बेहतरीन!!

Isha said...

uttam prastuti......

Onkar said...

gagar mein sagar

Reena Satin said...

Badhiya..

Neeraj Tyagi said...

धन्यवाद ..रीना जी ,ओंकार जी !

Neeraj Tyagi said...

धन्यवाद सीमा

कविता रावत said...

bahut sundar prerak kriti..

Neeraj Tyagi said...

thnx KAVITA JI

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