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Apr 12, 2012

रच पाओगे ?

अब यह  तुमने 
क्या  कह डाला 
इश्वर को "कल्पित "
कह डाला ?
सोचो -रचा 
उसीने तुमको /
क्यूँ भूले वह  
रचता सबको ?
तुम अब  रूप ही 
उस का रचते /
जैसा रचते 
वैसा बनते /
फिर  तुम हो 
अंश मात्र ही ,
रचना उसकी 
नाम मात्र ही /
उसको तो क्या 
रच पाओगे 
क्या अपने को 
रच पाओगे ?

19 comments:

sushma 'आहुति' said...

आप तो रच ही रहे......

Seema said...

Bahut hi sunder

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

सर्वप्रथम बैशाखी की शुभकामनाएँ और जलियाँवाला बाग के शहीदों को नमन!
आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर लगाई गई है!
सूचनार्थ!

रविकर फैजाबादी said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति |
बधाईयाँ ||

Dr.Manish Tiwari said...

yup you Did it extraordinary... Rach paoge.......Nahi Main nahi..

dk said...

Again an excellent piece:)

Dishak

Neeraj Tyagi(09717695017) said...

THANX A LOT :)

Kiran Arya said...

Namaskaar Sir bahut hi utkrisht bhav aur khoobsurat rachna.......abhaar sanjha karne ke liye.......

Neeraj Tyagi(09717695017) said...

thnx :)

Unknown said...

aap ki panktiyo ko parhne ke bad hane Kailash Gautam jee ki yad aati hai allahabad me rahte the

biradar said...

तुम हो अंश क्या अपने को
रच पाओगे!jant tumhi tumhi hoe jayi....

Neeraj Tyagi(09717695017) said...

:)Rai sahab?

Neeraj Tyagi(09717695017) said...

thnx Disha !

Neeraj Tyagi(09717695017) said...

Thnx Dr Manish !

कविता रावत said...

ishwar hai tabhi to aadmi aadmi bana rahta hai .
bahut badiya!

Vivek Khanna said...

बहुत बढ़िया

Manu Tyagi said...

गजब की रचना

Manu Tyagi said...

विचारोत्तेजक

expression said...

बेहतरीन...
गहन विचारोक्ति.....

अनु

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