May 30, 2012

" प्रेयसी "

साथ तेरे 
रोदन 
साथ तेरे 
क्रीडा 
यहाँ 
वहां 
जहाँ 
तहां ,
परछाई सी 
तू  है 
तू ही 
जीवन का रस 
प्रेम !

6 comments:

expression said...

बहुत सुंदर....

अनु

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

ana said...

wah wah wah....khubsurat abhiwykti

Shanti Garg said...

बहुत बेहतरीन रचना....
मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

Mr. Madhusudan Khemundu said...

nice poem, i like it.....

Neeraj Tyagi(09717695017) said...

thanx