Sep 3, 2012

आह !

उन्मुक्त गगन 
बादल सघन 
उड़ते पक्षी 
करते नर्तन 
दो पंखो से 
लहराते से ,
असीम आकाश 
 छूने की चाह ,
ओह लघु जीवन !
ओह यह आह !

3 comments:

Aravind Pandey Writes the Eternal Poetry - परावाणी said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...

Neeraj Tyagi(09717695017) said...

Thanks :-)

gyan dixit said...

अतिसुन्दर , हृदयंगम,
शब्द ने किये जागृत भाव ,....आह!