Mar 8, 2019

बन जा आत्म घाती

वो नारों का शोर
अहंकार सी ख़ुशी
गैरत के नाम पर
बस कर लो ख़ुदकुशी //

आज़ादी के सपने
सियासत में भिगाये
मासूमों की  गुमराही
झूठी जन्नत दिखाए //

कमसिन नादान वो
पथ्थरों से खेलते
कौन है दोस्त दुश्मन
कभी न जानते //

बस पत्थर  उठायें
जन्नत को ढूंढते
काफिरों को मार
फ़ना की ही सोचते //

भोले नादान वो
ज़िन्दगी दांव लगाते
इंसानियत के दुश्मनों की
 साजिश न भांप  पाते //

हथियार का जखीरा
कोई तो मोल लेगा
हिन्दू या मुस्लिम
कोई तो लड़ेगा

वो गैरत के नाम पर
मासूमों को बरगलाते
जला न पाते  गरीब की  दिया बाती
बारूद बाँध बस बन जा  आत्म घाती //




 //



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