5 अग॰ 2012

"चल भ्रम उड़ जा "

अब शोर बीच यूँ
कुछ तो बोलो 
इस चुप्पी को 
कुछ तो खोलो /
ढूंढ रहा यूँ 
कब से तुमको 
धुंध हटा अब 
देख  उजाला  
इस जग में 
मत रह  मतवाला 
आँख नशीली 
खोल ,  बोल अब  /
यही रहस्य तो 
यही  सौंदर्य  है /
अब भ्रम उड़ जा 
उड़ बादल सा 
आ यथार्थ अब 
दूर उड़ा जा 
स्वप्न चिरैया 
दूर कहीं अब 
आ प्रभात रवि 
उद्भासित कर जा 
चल भ्रम उड़ जा /

30 मई 2012

" प्रेयसी "

साथ तेरे 
रोदन 
साथ तेरे 
क्रीडा 
यहाँ 
वहां 
जहाँ 
तहां ,
परछाई सी 
तू  है 
तू ही 
जीवन का रस 
प्रेम !

28 मई 2012

"अनुभव "

मौन 
एक प्रार्थना 
जीवन 
एक आराधना 
सामीप्य तुम्हारा 
बस 
एक उपासना //

12 अप्रैल 2012

रच पाओगे ?

अब यह  तुमने 
क्या  कह डाला 
इश्वर को "कल्पित "
कह डाला ?
सोचो -रचा 
उसीने तुमको /
क्यूँ भूले वह  
रचता सबको ?
तुम अब  रूप ही 
उस का रचते /
जैसा रचते 
वैसा बनते /
फिर  तुम हो 
अंश मात्र ही ,
रचना उसकी 
नाम मात्र ही /
उसको तो क्या 
रच पाओगे 
क्या अपने को 
रच पाओगे ?

26 मार्च 2012

ये परखा तो

कौन कहाँ कैसा है प्याला 
ये परखा तो कैसी हाला 
परख परख मत बुन ये जाला 
पंछी बन उड़ पंखों वाला 
प्रेम सुरा पी बन मतवाला  //

"मैं"गया किधर?

एक अजनबी अनजाना सा 
नयन मिल गए फिर जाना सा ,
बार बार क्यूँ दृष्टि  उधर ही 
हर दृष्टि "मैं"गया किधर ही !
मूक नयन जादू कर जाते 
दृष्टि प्रेम का रस भर जाते /
नयन नयन से क्यूँ लड़ जाते 
बिन साकी प्याला भर जाते /
आ प्रियतम अब इसको पी लें 
भंग सुरा बिन मस्ती जी लें //

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