Jul 15, 2018

आई बरखा

आई बरखा
मस्ती  छलकी
मन मयूर मचला
 सुंदरी वो थिरकी/
बूंद बूंद फुहारें                        
बनी नरम चादर 
सूरज भी दुबका
बोल उठे दादुर/
बादल से मिले बादल
टकराए चमकें बिजली
भीग गए वस्त्र सब
मानस में उड़ती तितली/
आ नृत्य देख चंचल 
जा छोड़ सारे दलदल
मस्ती में थिरके भीगा तन
अब खूब मचले मेरा मन/"

No comments:

Featured Post

नेता महान

मै भारत का नेता हूँ  नेता नहीं अभिनेता हूँ  चमचे चिपकें जैसे गोंद  धोती नीचे हिलती तोंद // मेरी तोंद बढे हो मोटी  सारे चेले सेंक...