8 अक्टू॰ 2026

फलसफा

जीते जी जिस माँ को तुमने

दो रोटी तक नहीं खिलाई,

मरने पर हलवा-पूरी देकर

कौन-सी सेवा निभाई?


जिस पिता को जीते जी तुम

घर में जगह नहीं देते,

मरने पर तस्वीर के आगे

फूल चढ़ाकर क्या देते?


जीते जी जो माँ-बाबू को

वृद्धाश्रम छोड़ आता है,

बाद में लाखों खर्च करे तो

क्या सचमुच पुण्य पाता है?


श्राद्ध नहीं बस पिंडदान है,

श्राद्ध नहीं बस कर्मकांड,

माता-पिता की सेवा करना

सबसे पावन पुण्य-प्रसाद।


जब तक साँसें चलती हैं,

तब तक उनका मान करो,

बाद की पूजा छोड़ो 

पहले जीते जी सम्मान करो।


मरने के बाद कौन मिलेगा,

यह किसने देखा है?

माँ-बाप के चेहरे पर हँसता

स्वर्ग ही हमने देखा है।”


उस दिन घर के हर सदस्य ने

एक नया संकल्प लिया—


माँ-बाबूजी के रहते ही

उनका हर सुख अपना होगा,

जीते जी सम्मान मिलेगा,

यही हमारा श्राद्ध होगा। 🙏

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