3 फ़र॰ 2013

नहीं हूँ आभास

मुठ्ठी में लिए शब्द 
बिखरा दिए आस्मा मे 
छितराए से ,इतराए से 
जा मिले सितारों से 
 सितारों की उदासी दूर 
मैं  फिर अकेला ,
नशे में चूर /
  क्या है सबब  ,
क्यूँ  ये उदासी
ये चाहत है किसी की 
या चाहत है ओढी सी  ?
 खेलूँगा फिर शब्दों से 
दिखाऊंगा फिर छन्दो से 
ओ दूर वालों ! देखो !
क्या क्या बुनने की नियत ,
रूमी की रूमानियत ,
ये ओढ़े हुए लिबास ,
नहीं यूँ शक  न करो 
में सच हूँ ,
नहीं हूँ आभास //

5 जन॰ 2013

नवागत का स्वागत

नवागत का स्वागत 
रहें सदा जाग्रत 
फूलें फलें बना रहे हर्ष 
ऐसा रहे यह नव वर्ष /
भूलें जो हुआ व्यतीत 
सबक लें ,बनें कालातीत //
मन में रहे प्रार्थना 
करते रहें उपासना 
पुष्प गुच्छ से रहें पल्लवित 
नए साल में रहें उल्लसित //
श्रेष्ठता के नित नए प्रयास 
गिर कर उठें ,फिर बढ़ें 
छोड़ें ना अपनी आस //
महिलाएं हैं आन बान 
भारत वर्ष की शान ,
उनको दें सम्मान और प्यार 
फूले फले बगिया ,रहे सुगन्धित बयार //

29 दिस॰ 2012

ओ निर्भया !

ओ निर्भया !
हिल गया हिमालया 
संभले न संभलती अब हृदय की पीर 
छलक उठे अश्रु ,बह उठे नेत्र नीर ,/
ये छह मानव  , पशु से भी बदतर 
ये  दानव हैं ,पशु भी इनसे  बेहतर /
क्रूर से भी क्रूर ,वो छह नशे में चूर ,
माँ याद करे किलकारी ,बेटी हुई दूर /
 बेटी के आर्तनाद से ,कांपी होगी धरा ,
आर्यावर्त देश ,बच्चे बच्चे का दिल भरा /
रात्रि में वोह   कालिमा थी बस ,
वो  बस में ,बेबस थी जस की तस /
अब वहां ना था कुछ शेष  ,
अरे मानव ! बस तेरा अवशेष  
बस तेरा अवशेष  !

17 अक्टू॰ 2012

"लाल बत्ती"

यूँ चली सांस 
बढ़ती  रही आस 
अख़बारों के पन्ने 
खबरें कुछ ख़ास /
देखो कालिखों का खेल 
विज्ञापित हुई 
प्रतिष्ठाओं की सेल /
आरोपों के झड़ी
वक़्त के साथ बढ़ी /
भ्रष्ट हुए तंत्र 
फूला फला प्रजा तंत्र /
न कोई आदर्श या विचार 
बस वही वह  भ्रष्टाचार /
ईमानदारी से यूँ  मुंह चुराओ 
अनपढ़ों  की नौकरी लगवाओ /
दस शातिरों  को बनाओ ठेकेदार 
वाह वाह करें सब 
होयें  भतीजे मालदार /
इसी तरह बनेंगे 
अब "आम " से " ख़ास "
"भारत निर्माण " की 
यही एक आस /
संदेह न करेगा 
कोई भी रत्ती 
गाडी मिलेगी 
और ऊपर लाल बत्ती //

3 सित॰ 2012

आह !

उन्मुक्त गगन 
बादल सघन 
उड़ते पक्षी 
करते नर्तन 
दो पंखो से 
लहराते से ,
असीम आकाश 
 छूने की चाह ,
ओह लघु जीवन !
ओह यह आह !

5 अग॰ 2012

"चल भ्रम उड़ जा "

अब शोर बीच यूँ
कुछ तो बोलो 
इस चुप्पी को 
कुछ तो खोलो /
ढूंढ रहा यूँ 
कब से तुमको 
धुंध हटा अब 
देख  उजाला  
इस जग में 
मत रह  मतवाला 
आँख नशीली 
खोल ,  बोल अब  /
यही रहस्य तो 
यही  सौंदर्य  है /
अब भ्रम उड़ जा 
उड़ बादल सा 
आ यथार्थ अब 
दूर उड़ा जा 
स्वप्न चिरैया 
दूर कहीं अब 
आ प्रभात रवि 
उद्भासित कर जा 
चल भ्रम उड़ जा /

30 मई 2012

" प्रेयसी "

साथ तेरे 
रोदन 
साथ तेरे 
क्रीडा 
यहाँ 
वहां 
जहाँ 
तहां ,
परछाई सी 
तू  है 
तू ही 
जीवन का रस 
प्रेम !

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