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Dec 29, 2012

ओ निर्भया !

ओ निर्भया !
हिल गया हिमालया 
संभले न संभलती अब हृदय की पीर 
छलक उठे अश्रु ,बह उठे नेत्र नीर ,/
ये छह मानव  , पशु से भी बदतर 
ये  दानव हैं ,पशु भी इनसे  बेहतर /
क्रूर से भी क्रूर ,वो छह नशे में चूर ,
माँ याद करे किलकारी ,बेटी हुई दूर /
 बेटी के आर्तनाद से ,कांपी होगी धरा ,
आर्यावर्त देश ,बच्चे बच्चे का दिल भरा /
रात्रि में वोह   कालिमा थी बस ,
वो  बस में ,बेबस थी जस की तस /
अब वहां ना था कुछ शेष  ,
अरे मानव ! बस तेरा अवशेष  
बस तेरा अवशेष  !

6 comments:

Isha said...

marmsprshi bhav.......स्तब्ध ...निःशब्द...शोकाकुल...शर्मसार.....हम देशवासी

Neeraj Tyagi said...

Thanx

Kalipad "Prasad" said...

मन की पीड़ा की सुन्दर अभिव्यक्ति .http://kpk-vichar.blogspot.in & http://vicharanubhuti
में आपका स्वागत है.

Neeraj Tyagi said...

thnx ji

rajiv kumar tyagi said...

मन की व्यथा की अभिवयक्ति है .. फिर भी .. वाह ... कहने को दिल चाहता है .. वाह वाह ...

Asha Sharma Dohroo said...

Maramsparshi

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