16 जन॰ 2012

ओ प्रकृति !

इधर उधर छटा सी बिखरी ,
गर्जन तर्जन ,
बादलों सी बिखरी ,
पर्वत सागर ,
वृक्षों के झुण्ड से ,
इधर उधर चंचल से ,
जीव जंतु ,
पानी या थल के ,
हरियाली या मरुथल ,
बिखरी इधर उधर ,
देख वो अमराई सी ,
प्रकृति ,
ओ प्रकृति !

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