इधर उधर छटा सी बिखरी ,
गर्जन तर्जन ,
बादलों सी बिखरी ,
पर्वत सागर ,
वृक्षों के झुण्ड से ,
इधर उधर चंचल से ,
जीव जंतु ,
पानी या थल के ,
हरियाली या मरुथल ,
बिखरी इधर उधर ,
देख वो अमराई सी ,
प्रकृति ,
ओ प्रकृति !
"आज की अभिव्यक्ति "(Hindi Poems) कवि नीरज की दैनिक अभिव्यक्ति का एक अंश मात्र.....Contact 9717695017
16 जन॰ 2012
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3 टिप्पणियां:
सुंदर चित्रण ......प्रकृति अपने चाहने वालों को निराश नहीं करती, इसका साथ ही सबसे प्यारा..
धन्यवाद प्रिय !
चाँदनी ओढ़ धरा साई, कितनी सुन्दरता से प्रकृति'' का वर्णन कर गया कोई...प्यार से भींगा प्रकृति का गात साथी, आपकी क्या तारीफ करूँ ? आपकी है क्या बात साथी'...
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